दो ही विकल्प हैं, या तो इस्लाम अपना लें या भारत चले जाए

By | 05/07/2018

why afghani sikhs want to leave country

पिछले कई सदियों से अफगानिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय का हिस्सा रहे सिख अब भारत आने का फैसला कर रहे हैं. उन्होंने ये फैसला उस आत्मघाती हमले के बाद किया जिसमें इस समुदाय के कम से कम 13 लोगों की मौत हो गई थी. आईएस के इस हमले में हुई मौतों में वहां की संसद में इकलौते सिख अवतार सिंह खालसा और अपने समुदाय के बीच खासी पैठ रखने वाले रवैल सिंह शामिल थे.आईएस नहीं चाहता की अफ़ग़ानिस्तान में कोई गैर मुस्लिम चुनाव का हिस्सा हो।

पहले 250,000 सिख और हिंदू रहते थे, लेकिन देश में 300 के करीब सिख परिवार रह गए हैं। देश छोड़ने का फैसला करने वालों में शामिल तेजवीर सिंह का कहना है कि ये साफ है वो लोग अब वहां नहीं रह सकते. 35 साल के तेजवीर ने इस आत्मघाती हमले में अपने चाचा को खो दिया. उन्होंने आगे कहा कि हमारा धर्म अलग है जिसे यहां कि सरकार से मान्यता प्राप्त है, लेकिन आईएस के आतंकी हमारी धार्मिक आस्था के खिलाफ हैं क्योंकि हम मुसलमान नहीं हैं. आज इस देश में सिर्फ ३०० सीख परिवार बचे है और पुरे अफगानिस्तान में सिर्फ दो ही गुरुद्वारे (एक जलालाबाद और एक काबुल में) आज के तारीख में मौजूद है। कट्टर उग्रवादी इस्लामिक सोचवाली आईएस और तालिबान ने इनके रोजी रोटी से लेकर बहु बेटियोतक किसीसो नहीं छोड़ा, ऐसे में यह परिवार आज भारत का रुख करनेपर मजबूर है।

इस मुसलमान बहुल देश में साल 1990 में शुरू हुए सिविल वॉर के पहले 250,000 सिख और हिंदू रहते थे. यूएस डिपार्टमेंट की एक रिपोर्ट में कहा गया कि महज़ एक दशक पहले यहां 3000 के करीब सिख और हिंदू रहते थे. राजनीति में प्रतिनिधत्व होने और अपने धर्म को निभाने की अनुमति होने के बावजूद इनमें से बहुतों को पूर्वाग्रह का शिकार होने पड़ता है,

जलालाबाद में किताब और कपड़ों की दुकान के मालिक बलदेव सिंह का कहना है कि उनके पास दो ही विकल्प हैॆ, या तो धर्म बदलकर मुसलमान हो जाएं या भारत चले जाएं. आपको बता दें कि अफगानिस्तान के हिंदुओं और सिखों को भारत लॉन्ग टाइम वीज़ा जारी करता है, और इनको लेकर भारत ने हमेशा से सकारात्मक रुख अपनाया है चाहे फिर मोदी की सर्कार हो या फिर मनमोहन सिंह की। भारत ने इन लोगो को हमेशा अपना मन है और मानता रहेगा।